रांची
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अध्यक्ष आशा लकड़ा ने आज कहा कि संथाल परगना प्रमंडल की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है। बांग्लादेशी मुसलमान वहां कि आदिवासी युवतियों से शादी कर उनकी जमीन हड़प रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि बांग्लादेशी मुसलमानों के करण वहां के आदिवासी समुदाय के लोग उनके खिलाफ न तो कुछ बोल पा रहे हैं और न ही उनके खिलाफ थाना में एसटी केस दर्ज करा पा रहे हैं। कहा कि गोड्डा के तीन गांवों ऐसे हैं जहां केंद्र सरकार की किसी भी योजना को लेकर आदिवासी समुदाय के किसी भी परिवार का कार्ड नहीं बना है। लकड़ा ने आगे कहा, साहेबगंज के मंडरो, देवदान, झिल्ली पहाड़िया, एता घाटी, बरहेट, संथाली उत्तर व दक्षिण, उधवा में डेमोग्राफी चेंज है।

एसटी का एक भी केस दर्ज नहीं
इस बाबत स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखकर लकड़ा ने कहा कि गोड्डा में पिछले सात माह से एसटी का एक भी केस दर्ज नहीं हुआ है। मैने वहां के डीसी व एसपी को आयोग की ओर से कहा है कि हर थाना में एसटी केस दर्ज करने की व्यवस्था और संबंधित एसटी केस को जिले में हस्तांतरित करने की व्यवस्था करें। संथाल परगना प्रमंडल के साहेबगंज, राजमहल, उधवा, मुंडरो, बोरयो, तालझरी, पतना, बरहेट और बरहरवा एसटी बहुल क्षेत्र हैं, वहां की स्थित बहुत खराब है। बरहेट प्रखंड के संथाली उत्तर व दक्षिण पंचायत सेंसेटिव क्षेत्र हैं। वहां की डेमोग्राफी चेंज है। नोटरी के एफिडेविट व दानपत्र के माध्यम से आदिवासी समुदाय के लोगों की जमीन बेची जा रही है।

पाकुड़ हादसे की जानकारी मांगी
लकडा ने कहा कि पाकुड़ में दो दिन पहले आदिवासी हॉस्टल में 150 पुलिस कर्मियों ने बेरहमी से आदिवासी छात्रों की पिटाई कर दी। शराब के नशे में धुत एक पुलिस कर्मी घटना से पूर्व आदिवासी हॉस्टल पहुंचा और उसने एक गायब लड़की के हॉस्टल में होने की बात कही थी। इसके संबंधित पुलिस कर्मी ने 150 पुलिस कर्मियों को बुलाकर आदिवासी छात्रों की बेरहमी से पिटाई की। आयोग की ओर से इस मामले को संज्ञान में लेते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी, डीसी और एसपी को नोटिस जारी कर तीन दिनों में विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
